एक ख्वाइश सिरहाने रख दो ना, लव शायरिया

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जाने उस शख्स को कैसे ये हुनर आता है,
रात होती है तो आँखों में उतर आता है।
मैं उस के खयालो से बच के कहाँ जाऊं,
वो मेरी सोच के हर रस्ते पे नजर आता है।
एक ख्वाइश सिरहाने रख दो ना,
आज मुझ पे तुम इनायत कर दो ना।
ज़रा चुपके से खामोशी से,
तुम इज़हार-ए-मोहब्बत कर दो ना!


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हाथ पकड़ कर रोक लेते अगर,
तुझ पर ज़रा भी ज़ोर होता मेरा।
ना रोते हम यूँ तेरे लिये,
अगर हमारी ज़िन्दगी में तेरे सिवा कोई ओर होता।


जिसको चाहो उसे चाहत बता भी देना,
कितना प्यार है उससे यह जता भी देना।
यूँ ना हो की उसका दिल कहीं और लग जाए,
करके इज़हार उसके दिल को चुरा भी लेना।

 

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फ़ा की ज़ंज़ीर से डर लगता है,
कुछ अपनी तक़दीर से डर लगता है।
जो मुझे तुझसे जुदा करती है,
हाथ की उस लकीर से डर लगता है


इज़हार मोहब्बत का कुछ ऐसे हुआ,
क्या कहें की प्यार कैसे हुआ।
उनकी एक झलक पे निसार हुए हम,
सादगी पे मर-मिटे और आँखो से इक़रार हुआ।


काश उन्हें चाहने का अरमान नही होता,
में होश में होकर भी अंजान नही होता।
ये प्यार ना होता, किसी पत्थर दिल से,
या फिर कोई पत्थर दिल इंसान ना होता।

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